Category: Rachana Sangrah

एक पहल,

जब सोच दिशाहीन होने लगे और सकारात्मकता का आभाव स्पस्ट दिखाई पड़े, वह समय भ्रम की स्थिति पैदा करने वाला समय होता है। यह भ्रम किसी कार्य को करने …

जाति प्रश्न

ॐ इस समय कहीं भी ,कभी भी चाहे बौद्धिक या अबौद्धिक, दैनिक जीवन के विचारों में जिस निष्फल प्रश्न को जन्म देते हैं , वह है –जाति प्रश्न | …

शरीर और प्रकृति

ॐ संसार में दो ही सम्बन्ध शाश्वत हैं – शरीर और प्रकृति का| शरीर अराजक स्वछन्द अहं- वादी शासक है जबकि प्रकृति उसकी सहचरी शक्ति है| प्रकृति प्रतिपल शरीर …

प्रेमचंद के मानवेतर चरित्र

ॐ कथाकार प्रेमचंद की लेखन शैली की विशेषता यह रही है कि चरित्र और परिवेश के चुनाव में एक सतर्क दृष्टि तथा सोद्देश्य वातावरण निर्माण के कारण कहानी प्रत्येक …

साहित्य जीवन का कोलाज़ है

ॐ मानव जीवन की सनातन उपलब्धि का बोध जिस शास्त्र से प्रमाण सहित प्राप्त होता है उसका नाम साहित्य है . साहित्य नाम इसलिए कि इस चेतना की विशेषता …