Category: Kavita Sangrah

पिता होता है बनता नहीं

ॐ पितापुरुष नहींपद हैसनातन पर निर्भारप्रथम पिता नेअपनी संतति कोअपार धरती , प्राण वायुप्रकृति का उदार स्नेह,नदियां ,पर्वत , जीवन बांटती वनस्पतियां चांद, सूरज, तारे,आकाशकी देखरेख में ,काल की अदृश्य उपस्थितिसौंपकरइस पद …

शाम होते ही…

ॐ शाम होते ही हवाएँ गुम हैं साँस लें भी तो नहीं और जियें कैसे दिन के हर गर्दो गुबारों को लिए लौटा हूँ घर वह तो जब भूल …

निकला नहीं हूँ अब तक मगर

ॐ निकला नहीं हूँ अब तक मगर निकाल दिया जाऊँगा –जब जोखिम का एक विशाल शिला खंड तुम्हारी ओर लुढकाने तुम्हारी पीढ़ी दर पीढ़ी को अचानक किसी दोपहर कुछ …

शब्द

ॐ बख्श दीजिये आँखों पे ना इतना चढ़ाइए कल कोई पहचानने से इंकार ना कर दे शब्द  अजन्मा अशेष शाश्वत  मूल धातु तो ध्वनि है  जो आकृति –मूलक होकर  आकार …

हमारे मोहल्ले में

ॐ हमारे मोहल्ले में – सुबह होती है कुछ लोग हाथ में झाड़ू ,पानी भरा मग लगभग दौड़ते  हुए / सब के पांव धोती लुंगी पाजामे में पहुँचने जर्जर …