शाम होते ही…

ॐ शाम होते ही हवाएँ गुम हैं साँस लें भी तो नहीं और जियें कैसे दिन के हर गर्दो गुबारों को लिए लौटा हूँ घर वह तो जब भूल …

निकला नहीं हूँ अब तक मगर

ॐ निकला नहीं हूँ अब तक मगर निकाल दिया जाऊँगा –जब जोखिम का एक विशाल शिला खंड तुम्हारी ओर लुढकाने तुम्हारी पीढ़ी दर पीढ़ी को अचानक किसी दोपहर कुछ …

शरीर और प्रकृति

ॐ संसार में दो ही सम्बन्ध शाश्वत हैं – शरीर और प्रकृति का| शरीर अराजक स्वछन्द अहं- वादी शासक है जबकि प्रकृति उसकी सहचरी शक्ति है| प्रकृति प्रतिपल शरीर …

शब्द

ॐ बख्श दीजिये आँखों पे ना इतना चढ़ाइए कल कोई पहचानने से इंकार ना कर दे शब्द  अजन्मा अशेष शाश्वत  मूल धातु तो ध्वनि है  जो आकृति –मूलक होकर  आकार …

प्रेमचंद के मानवेतर चरित्र

ॐ कथाकार प्रेमचंद की लेखन शैली की विशेषता यह रही है कि चरित्र और परिवेश के चुनाव में एक सतर्क दृष्टि तथा सोद्देश्य वातावरण निर्माण के कारण कहानी प्रत्येक …

हमारे मोहल्ले में

ॐ हमारे मोहल्ले में – सुबह होती है कुछ लोग हाथ में झाड़ू ,पानी भरा मग लगभग दौड़ते  हुए / सब के पांव धोती लुंगी पाजामे में पहुँचने जर्जर …

जन गण मन

ॐ जन –आँख उठाये /तकते गगन उलझती आँखों से /संकट की राह भरोसा किसीका नहीं /हांफती जिंदगी जो छूता /वही पत्थर कहाँ जाए /किसे कहे एक खारा सैलाब /चल …

सुख – दुःख

ॐ जिस सुख को पाया है तूने क्या वह सुख तेरा है ? जिस दुःख को पाया है तूने क्या वह दुःख तेरा है ? क्या होता सुख पा …

साहित्य जीवन का कोलाज़ है

ॐ मानव जीवन की सनातन उपलब्धि का बोध जिस शास्त्र से प्रमाण सहित प्राप्त होता है उसका नाम साहित्य है . साहित्य नाम इसलिए कि इस चेतना की विशेषता …

कलाम को सलाम

ॐ आज फिर हम जुटे हैं तिरंगे हवा में लहराने जश्न मनाने /देश –भक्ति के – ज़ज्बे दिल में जगाने – खोजने होंगे उन शब्दों को जिससे एक कलाम …