Month: January 2017

शहर शुभकामनाओं से टंगा भरा है

ॐ जन गण मन अभिशप्त आतंकित हो उठा है जिस किसी ने अपने चेहरे होर्डिंगों में हाथ जोड़े नम्रता की कोशिशों में गौर से देखो ,चमक उसकी नज़र की एक भूखे भेड़िए की लपलपाती जीभ टपकती लार की बूंदों से नहाये ,गंधाये वे शब्द हर नुक्कड़ को अपने अपने...

शाम होते ही…

ॐ शाम होते ही हवाएँ गुम हैं साँस लें भी तो नहीं और जियें कैसे दिन के हर गर्दो गुबारों को लिए लौटा हूँ घर वह तो जब भूल चुका था तो मिले कैसे कितने सूरज को जो झेला हो वो कम कैसे है अब तो एहसास ही नहीं...